अथर्ववेद (कांड 15)
स यद्ध्रु॒वांदिश॒मनु॒ व्यच॑ल॒द्विष्णु॑र्भू॒त्वानु॒व्यचलद्वि॒राज॑मन्ना॒दीं कृ॒त्वा ॥ (९)
जब वह ध्रुव दिशा की ओर चला, तब विराट को अन्नाद बता कर स्वयं विष्णु रूप में चला. (९)
When he walked towards the pole direction, he went in the form of Vishnu himself, calling Virat Annad. (9)