हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 15.17.2

कांड 15 → सूक्त 17 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
तस्य॒व्रात्य॑स्य।योऽस्य॑ द्वि॒तीयो॑ व्या॒नस्तद॒न्तरि॑क्षम् ॥ (२)
इस का द्वितीय व्यान अंतरिक्ष है. (२)
The second of this is the vyan space. (2)