हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 15.18.3

कांड 15 → सूक्त 18 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
योऽस्य॒दक्षि॑णः॒ कर्णो॒ऽयं सो अ॒ग्निर्योऽस्य॑ स॒व्यः कर्णो॒ऽयं स पव॑मानः ॥ (३)
इस का दाहिना कान अग्नि और बायां कान पवमान है. (३)
Its right ear is agni and the left ear is poman. (3)