हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 15.18.5

कांड 15 → सूक्त 18 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
अह्ना॑प्र॒त्यङ्व्रात्यो॒ रात्र्या॒ प्राङ्नमो॒ व्रात्या॑य ॥ (५)
यह व्रात्य दिन में सबके लिए पूज्य है. इस प्रकार के व्रात्य को नमस्कार है. (५)
It is revered for everyone on the day. Salutations to this type of vratya. (5)