हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 15.2.26

कांड 15 → सूक्त 2 → मंत्र 26 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
श्रु॒तं च॒विश्रु॑तं च परिष्क॒न्दौ मनो॑ विप॒थम् ॥ (२६)
ज्ञान और विज्ञान उस के रक्षक होते हैं तथा मन उस का युद्ध संबंधी रथ होता है. (२६)
Knowledge and science are its protectors and the mind is its war chariot. (26)