हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 15.2.27

कांड 15 → सूक्त 2 → मंत्र 27 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
मा॑त॒रिश्वा॑ च॒पव॑मानश्च विपथवा॒हौ वातः॒ सार॑थी रे॒ष्मा प्र॑तो॒दः ॥ (२७)
श्वास और उच्छ्वास उस के रथ के घोड़े, प्राण सारथी और वायु उस का चाबुक बनता है. (२७)
Breathing and exhalation make the horse of his chariot, the charioteer and the air his whip. (27)