हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 15.3.11

कांड 15 → सूक्त 3 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 3
विश्वा॑न्ये॒वास्य॑ भू॒तान्यु॑प॒सदो॑ भवन्ति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (११)
जो इस बात को जानता है, सभी प्राणी उस के मित्र हो जाते हैं. (११)
Whoever knows this, all beings become his friends. (11)