हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 15.5.2

कांड 15 → सूक्त 5 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
भव॑ एनमिष्वा॒सःप्राच्या॑ दि॒शो अ॑न्तर्दे॒शाद॑नुष्ठा॒तानु॑ तिष्ठति नैनं॑ श॒र्वो नभ॒वो नेशा॑नः ॥ (२)
जो इस बात को जानता है, धनुष धारण करने वाले भव अर्थात्‌ महादेव, शर्व, ईशान उस के अनुकूल रहते हैं. (२)
Those who know this, those who wear bows, i.e. Mahadev, Sharva, Ishan, are favorable to him. (2)