हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
तस्मै॒ प्राच्या॑दि॒शो अ॑न्तर्दे॒शाद्भ॒वमि॑ष्वा॒सम॑नुष्ठा॒तार॑मकुर्वन् ॥ (१)
देवताओं ने पूर्व दिशा के कोने से उस की रक्षा के लिए धनुष धारण करने वाले भव अर्थात्‌ महादेव को उस का अनुष्ठान करने वाला बनाया. (१)
The gods made Bhava, i.e. Mahadev, who was wearing a bow to protect him from the corner of the east direction, to perform his rituals. (1)

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
भव॑ एनमिष्वा॒सःप्राच्या॑ दि॒शो अ॑न्तर्दे॒शाद॑नुष्ठा॒तानु॑ तिष्ठति नैनं॑ श॒र्वो नभ॒वो नेशा॑नः ॥ (२)
जो इस बात को जानता है, धनुष धारण करने वाले भव अर्थात्‌ महादेव, शर्व, ईशान उस के अनुकूल रहते हैं. (२)
Those who know this, those who wear bows, i.e. Mahadev, Sharva, Ishan, are favorable to him. (2)

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
नास्य॑ प॒शून्न स॑मा॒नान्हि॑नस्ति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (३)
जो इसे जानता है, उस के अनुकूल रहने वाले पुरुषों और पशुओं की वे हिंसा नहीं करते. (३)
They do not oppress men and animals who live in harmony with him who knows it. (3)

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
तस्मै॒दक्षि॑णाया दि॒शो अ॑न्तर्दे॒शाच्छ॒र्वमि॑ष्वा॒सम॑नुष्ठा॒तार॑मकुर्वन् ॥ (४)
देवताओं ने दक्षिण दिशा की ओर से बाण चलाने वाले शर्व अर्थात्‌ शिव को उस का अनुष्ठान करने वाला बनाया. (४)
The gods made Sharva, i.e. Shiva, who agnid arrows from the south direction, the one who performed the ritual of it. (4)

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
श॒र्वए॑नमिश्वा॒सो दक्षि॑णाया दि॒शो अ॑न्तर्दे॒शाद॑नुष्ठा॒तानु॑ तिष्ठति॒ नैनं॑श॒र्वो न भ॒वो नेशा॑नः । नास्य॑ प॒शून्न स॑मा॒नान्हि॑नस्ति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (५)
जो इस बात को जानता है, दक्षिण दिशा के कोण से शर्व, भव और ईशान उस के अनुकूल रहते हैं. जो पुरुष और पशु उस के अनुकूल होते हैं. शर्व उन की हिंसा नहीं करते. (५)
Whoever knows this, sharva, bhava and ishan are favorable to him from the angle of south direction. Men and animals who adapt to him. Sharvas do not violence them. (5)

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
तस्मै॑प्र॒तीच्या॑ दि॒शो अ॑न्तर्दे॒शात्प॑शु॒पति॑मिष्वा॒सम॑नुष्ठा॒तार॑मकुर्वन् ॥ (६)
देवताओं ने पश्चिम दिशा के कोने से बाण फेंकने वाले पशुपति को उस का अनुष्ठान करने वाला नियुक्त किया. (६)
The gods appointed Pashupati, who threw arrows from the west corner, as the ritualist. (6)

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
प॑शु॒पति॑रेनमिष्वा॒सः प्र॒तीच्या॑ दि॒शो अ॑न्तर्दे॒शाद॑नुष्ठा॒तानु॑ तिष्ठति॒नैनं॑ श॒र्वो न भ॒वो नेशा॑नः । नास्य॑ प॒शून्न स॑मा॒नान्हि॑नस्ति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (७)
जो इस बात को जानता है, पशुपति पश्चिम दिशा के कोने से उस के अनुकूल रहते हैं. जो पुरुष और पशु उस के अनुकूल होते हैं, पशुपति उन की हिंसा नहीं करते हैं. (७)
Whoever knows this, Pashupati adapts to him from the corner of the west direction. Pashupati does not do violence to men and animals that suit him. (7)

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
तस्मै॑उदी॑च्या॑ दि॒शो अ॑न्तर्दे॒शादु॒ग्रं दे॑वमिष्वा॒सम॑नुष्ठा॒तार॑मकुर्वन् ॥ (८)
देवों ने पश्चिम दिशा के कोने से धनुष धारण करने वाले पशुपति को इस का अनुष्ठान करने वाला बनाया. (८)
The devas made Pashupati, who was wearing a bow from the corner of the west direction, to perform this ritual. (8)
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