हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 15.5.8

कांड 15 → सूक्त 5 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 15)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
तस्मै॑उदी॑च्या॑ दि॒शो अ॑न्तर्दे॒शादु॒ग्रं दे॑वमिष्वा॒सम॑नुष्ठा॒तार॑मकुर्वन् ॥ (८)
देवों ने पश्चिम दिशा के कोने से धनुष धारण करने वाले पशुपति को इस का अनुष्ठान करने वाला बनाया. (८)
The devas made Pashupati, who was wearing a bow from the corner of the west direction, to perform this ritual. (8)