हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 16.6.11

कांड 16 → सूक्त 6 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 6
तद॒मुष्मा॑ अग्नेदे॒वाः परा॑ वहन्तु॒ वघ्रि॒र्यथास॑द्विथु॒रो न सा॒धुः ॥ (११)
हे अग्नि देव! सभी देव सभी प्रकार की उन आपत्तियों को हमारे शत्रुओं की ओर ले जाएं, जिनके कारण हमारे शत्रु पौरुषहीन व्याधि और सज्जनों को प्राप्त होने वाले यज्ञ को न पाकर अपयश भोगें. (११)
O God of Agni! May all the gods take all kinds of objections to our enemies, due to which our enemies suffer humiliation by not getting the sacrifice received by the human diseases and gentlemen. (11)