अथर्ववेद (कांड 16)
जि॒तम॒स्माक॒मुद्भि॑न्नम॒स्माक॑मृ॒तम॒स्माकं॒ तेजो॒ऽस्माकं॒ ब्रह्मा॒स्माकं॒स्वर॒स्माकं॑य॒ज्ञो॒ऽस्माकं॑ प॒शवो॒ऽस्माकं॑ प्र॒जा अ॒स्माकं॑ वी॒राअ॒स्माक॑म् । तस्मा॑द॒मुं निर्भ॑जामो॒ऽमुमा॑मुष्याय॒णम॒मुष्याः॑ पु॒त्रम॒सौ यः । स प्र॒जाप॑तेः॒ पाशा॒न्मा मो॑चि । तस्येदं वर्च॒स्तेजः॑ प्रा॒णमायु॒र्निवे॑ष्टयामी॒दमे॑नमध॒राञ्चं॑ पादयामि ॥ (११)
शत्रुओं को मार कर और जीत कर लाए हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, संतान तथा सभी वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले और अमुक स्त्री के पुत्र को हम इस लोक से दूर करते हैं, वह प्रजापति के बंधन से मुक्त न हो. मैं उस के तेज, वर्च, प्राण और आयु को लपेट कर उसे औंधे मुंह गिराता हूं. (११)
All the substances that have been brought by killing and conquering enemies are ours. Truth, glory, Brahman, heaven, animals, children and all heroes are ours. We remove the son of such a tribe and such a woman from this world, he should not be free from the bondage of Prajapati. I wrap his glory, verch, life and age and make him fall face down. (11)