हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
जि॒तम॒स्माक॒मुद्भि॑न्नम॒स्माक॑मृ॒तम॒स्माकं॒ तेजो॒ऽस्माकं॒ ब्रह्मा॒स्माकं॒स्वर॒स्माकं॑ य॒ज्ञो॒ऽस्माकं॑ प॒शवो॒ऽस्माकं॑ प्र॒जा अ॒स्माकं॑ वी॒राअ॒स्माक॑म् ॥ (१)
हमारा उदय हो. हम सत्य को प्राप्त करें, हमारा तेज बढ़े. हमारा ज्ञान बढ़े तथा हमारे उत्तम प्रकाश में वृद्धि हो. हमारे यज्ञ सफल हों, हमारे अधिकार में पशु हों, हमारी संतान की वृद्धि हो. हमारे लोग वीर हों. (१)
May we rise. May we attain the truth, may our glory increase. May our knowledge increase and our glory spread. May our yajna be successful, may cattle be in our possession, may our progeny increase. May our people be brave. (1)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
तस्मा॑द॒मुंनिर्भ॑जामो॒ऽमुमा॑मुष्याय॒णम॒मुष्याः॑ पु॒त्रम॒सौ यः ॥ (२)
इस अपराध के कारण हम शत्रु पर आक्रमण करते हैं. इस गोत्र वाला तथा इस का पुत्र हमारा शत्रु है. (२)
Because of this crime, we attack the enemy. This tribe and its son are our enemies. (2)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
स ग्राह्याः॑पाशा॒न्मा मो॑चि ॥ (३)
वह रोग के पाशों से न छूट सके. (३)
He cannot get rid of the loops of the disease. (3)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
तस्ये॒दंवर्च॒स्तेजः॑ प्रा॒णमायु॒र्नि वे॑ष्टयामी॒दमे॑नमध॒राञ्चं॑ पादयामि ॥ (४)
उस के तेज, बल, प्राण और आयु को मैं घेरता हूं. मैं इसे नीचे गिराता हूं. (४)
I surround his glory, strength, life and age. I knock it down. (4)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
जि॒तम॑स्माक॒मुद्भि॑न्नम॒स्माक॑मृ॒तम॒स्माकं॒ तेजो॒ऽस्माकं॒ ब्रह्मा॒स्माकं॒स्वर॒स्माकं॑ य॒ज्ञो॒ऽस्माकं॑ प॒शवो॒ऽस्माकं॑ प्र॒जा अ॑स्माकं वी॒राअ॒स्माक॑म् । तस्मा॑द॒मुं निर्भ॑जामो॒ऽमुमा॑मुष्याय॒णम॒मुष्याः॑ पु॒त्रम॒सौ यः । स निरृ॑त्याः॒ पाशा॒न्मा मो॑चि । तस्येदं वर्च॒स्तेजः॑ प्रा॒णमायु॒र्निवे॑ष्टयामी॒दमे॑नमधराञ्चं पादयामि ॥ (५)
शत्रुओं को मार कर लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, प्रजा तथा सभी वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले और अमुक स्त्री के पुत्र को, हम इस लोक से दूर करते हैं. मैं उस के तेज, बल, प्राण और आयु को घेरता हूं. वह दुर्गति के पाशों से न छूट सके. (५)
All the things that have killed and won the enemies are ours. Truth, glory, Brahman, heaven, animals, subjects and all heroes are ours. We remove the son of such a tribe and such a woman from this world. I surround his radiance, strength, soul and age. He could not get rid of the traps of misery. (5)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
जि॒तम॒स्माक॒मुद्भि॑न्नम॒स्माक॑मृ॒तम॒स्माकं॒ तेजो॒ऽस्माकं॒ ब्रह्मा॒स्माकं॒स्वर॒स्माकं॑य॒ज्ञो॒ऽस्माकं॑ प॒शवो॒ऽस्माकं॑ प्र॒जा अ॒स्माकं॑ वी॒राअ॒स्माक॑म् । तस्मा॑द॒मुं निर्भ॑जामो॒ऽमुमा॑मुष्याय॒णम॒मुष्याः॑ पु॒त्रम॒सौ यः । सोऽभू॑त्याः॒ पाशा॒न्मा मो॑चि । तस्येदं वर्च॒स्तेजः॑ प्रा॒णमायु॒र्निवे॑ष्टयामी॒दमे॑नमध॒राञ्चं॑ पादयामि ॥ (६)
शत्रुओं को मार कर लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, प्रजा तथा सभी वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले और अमुक स्त्री के पुत्र को, हम इस लोक से दूर करते हैं. मैं उस के तेज, बल, प्राण और आयु को घेरता हूं. वह दरिद्रता के पाशों से न छूटने पाए. (६)
All the things that have killed and won the enemies are ours. Truth, glory, Brahman, heaven, animals, subjects and all heroes are ours. We remove the son of such a tribe and such a woman from this world. I surround his radiance, strength, soul and age. He should not get rid of the loops of poverty. (6)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
जि॒तम॒स्माक॒मुद्भि॑न्नम॒स्माक॑मृ॒तम॒स्माकं॒ तेजो॒ऽस्माकं॒ ब्रह्मा॒स्माकं॒स्वर॒स्माकं॑य॒ज्ञो॒ऽस्माकं॑ प॒शवो॒ऽस्माकं॑ प्र॒जा अ॒स्माकं॑ वी॒राअ॒स्माक॑म् । तस्मा॑द॒मुं निर्भ॑जामो॒ऽमुमा॑मुष्याय॒णम॒मुष्याः॑ पु॒त्रम॒सौ यः । स निर्भू॑त्याः॒ पाशा॒न्मा मो॑चि । तस्येदं वर्च॒स्तेजः॑ प्रा॒णमायु॒र्निवे॑ष्टयामी॒दमे॑नमध॒राञ्चं॑ पादयामि ॥ (७)
शत्रुओं को मार कर लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, प्रजा तथा सभी वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले और अमुक स्त्री के पुत्र को, हम इस लोक से दूर करते हैं. मैं उस के तेज, बल, प्राण और आयु को घेरता हूं. वह बुरी अवस्था के पाशों से न छूट सके. (७)
All the things that kill and conquer enemies are ours. Truth, glory, Brahman, heaven, animals, people and all heroes are ours. We keep away the son of such a tribe and the son of such a woman from this world. I surround his brilliance, strength, soul and age. He could not get rid of the clutches of bad condition. (7)

अथर्ववेद (कांड 16)

अथर्ववेद: | सूक्त: 8
जि॒तम॒स्माक॒मुद्भि॑न्नम॒स्माक॑मृ॒तम॒स्माकं॒ तेजो॒ऽस्माकं॒ ब्रह्मा॒स्माकं॒स्वर॒स्माकं॑य॒ज्ञो॒ऽस्माकं॑ प॒शवो॒ऽस्माकं॑ प्र॒जा अ॒स्माकं॑ वी॒राअ॒स्माक॑म् । तस्मा॑द॒मुं निर्भ॑जामो॒ऽमुमा॑मुष्याय॒णम॒मुष्याः॑ पु॒त्रम॒सौ यः । स परा॑भूत्याः॒ पाशा॒न्मा मो॑चि । तस्येदं वर्च॒स्तेजः॑ प्रा॒णमायु॒र्निवे॑ष्टयामी॒दमे॑नमध॒राञ्चं॑ पादयामि ॥ (८)
शत्रुओं को मार कर लाए हुए तथा जीते हुए सभी पदार्थ हमारे हैं. सत्य, तेज, ब्रह्म, स्वर्ग, पशु, प्रजा तथा सभी वीर हमारे हैं. अमुक गोत्र वाले और अमुक स्त्री के पुत्र को, हम इस लोक से दूर करते हैं. मैं उस के तेज, बल, प्राण और आयु को घेरता हूं. वह पराजय के पाशों से न छूटने पाए. (८)
All the things that have killed and won the enemies are ours. Truth, glory, Brahman, heaven, animals, subjects and all heroes are ours. We remove the son of such a tribe and such a woman from this world. I surround his radiance, strength, soul and age. He could not get rid of the traps of defeat. (8)
Page 1 of 5Next →