अथर्ववेद (कांड 18)
सखा॑य॒ आशि॑षामहे ब्र॒ह्मेन्द्रा॑य व॒ज्रिणे॑ । स्तु॒ष ऊ॒ षु नृत॑माय धृ॒ष्णवे॑ ॥ (३७)
हम सखा रूप इंद्र के लिए दृढ़ कार्य करने की इच्छा रखते हैं. उन शत्रुओं का मर्दन करने वाले महान नेता और वज्रधारी इंद्र की हम स्तुति करते हैं. (३७)
We wish to work firmly for Sakha Roop Indra. We praise Indra, the great leader and vajradhari who killed those enemies. (37)