अथर्ववेद (कांड 18)
अपे॑त॒ वीत॒ विच॑ सर्प॒तातो॒ऽस्मा ए॒तं पि॒तरो॑ लो॒कम॑क्रन्।अहो॑भिर॒द्भिर॒क्तुभि॒र्व्यक्तं य॒मो द॑दात्यव॒सान॑मस्मै ॥ (५५)
हे राक्षसो! तुम इस स्थान से भागो. तुम चाहे यहां पर पहले से रहते हो अथवा नए आकर रहने लगे हो, तुम यहां से चले जाओ, क्योंकि यह स्थान इस प्रेत के लिए दिन, रात और जल के सहित रहने के लिए यम ने प्रदान कियाहै. (५५)
O demons! You run from this place. Whether you already live here or have started living new, you should leave here, because this place has been provided by Yama for this ghost to live with day, night and water. (55)