हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 18.1.58

कांड 18 → सूक्त 1 → मंत्र 58 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 18)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
अङ्गि॑रसो नःपि॒तरो॒ नव॑ग्वा॒ अथ॑र्वाणो॒ भृग॑वः सो॒म्यासः॑ । तेषां॑ व॒यं सु॑म॒तौय॒ज्ञिया॑ना॒मपि॑ भ॒द्रे सौ॑मन॒से स्या॑म ॥ (५८)
प्राचीन अंगिरा ऋषि हमारे पितर हैं. नवीन स्तोक वाले अथर्वा तथा भृगु हमारे पितर हैं ये सब सोमरस का पान करने वाले हैं. हम उन की कृपा दृष्टि में रहें. वे हम से प्रसन्न रहें (५८)
Ancient Angira Rishi is our father. Atharva and Bhrigu with new stoks are our fathers, they are all somras drinkers. Let us be kind to them. May they be pleased with us (58)