हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 18.2.43

कांड 18 → सूक्त 2 → मंत्र 43 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 18)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
उदि॒मां मात्रां॑मिमीमहे॒ यथाप॑रं॒ न मासा॑तै । श॒ते श॒रत्सु॑ नो पु॒रा ॥ (४३)
उत्कृष्ट साधन वाली नाप से हम इस श्मशान को नापते हैं, जिस से हमें सौ वर्ष से पहले बीच में ही दूसरा श्मशान कर्म प्राप्त न हो. (४३)
We measure this crematorium with excellent means, so that we do not get another cremation deed in the middle before a hundred years. (43)