हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 18.2.56

कांड 18 → सूक्त 2 → मंत्र 56 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 18)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
इ॒मौ यु॑नज्मिते॒ वह्नी॒ असु॑नीताय॒ वोढ॑वे । ताभ्यां॑ य॒मस्य॒ सद॑नं॒ समि॑ति॒श्चाव॑ गच्छतात् ॥ (५६)
हे मृतक! भार ढोने वाले इन बैलों को मैं तेरे लिए छोड़ रहा हूं. मैं इन्हें प्राणों का वहन करने के लिए बैलगाड़ी में जोड़ता हूं. बैलों से युक्त इस गाड़ी के द्वारा तू यम के घर को प्राप्त हो. (५६)
O dead! I am leaving these load-carrying bulls for you. I add them to the bullock cart to bear their lives. Through this car containing bulls, you get yama's house. (56)