अथर्ववेद (कांड 18)
वर्च॑सा॒ मांसम॑नक्त्व॒ग्निर्मे॒धां मे॒ विष्णु॒र्न्यनक्त्वा॒सन् । र॒यिं मे॒ विश्वे॒ निय॑च्छन्तु दे॒वाः स्यो॒ना मापः॒ पव॑नैः पुनन्तु ॥ (११)
अग्नि देव मुझे तेजस्वी बनाएं तथा विष्णु मेरे मुख में बुद्धि को भलीभांति स्थापित करें. विश्वे देव मुझे सुख देने वाले धन का स्वामी बनाएं. जल अपने शुद्ध साधन वायु के द्वारा मुझे पवित्र करें. (११)
May God Agni make me radiant and May Vishnu establish wisdom well in my mouth. May God make me the master of wealth that gives me happiness. May water sanctify me through its pure means of air. (11)