अथर्ववेद (कांड 18)
यो म॒मार॑प्रथ॒मो मर्त्या॑नां॒ यः प्रे॒याय॑ प्रथ॒मो लो॒कमे॒तम् । वै॑वस्व॒तं सं॒गम॑नं॒जना॑नां य॒मं राजा॑नं ह॒विषा॑ सपर्यत ॥ (१३)
यम मरणधर्मा मनुष्यों में उत्पन्न हुए थे. सब से पहले उन्हीं की मृत्यु हुई थी. इस के पश्चात ये दूसरे लोक में पहुंचे. यम सूर्य के पुत्र हैं. सभी प्राणी मृत्यु के पश्चात इन्हीं के पास जाते हैं. हे ऋत्विजो! इन यम का पूजन करो जो सब को पाप और पुण्य के अनुसार फल देते हैं. (१३)
Yama was born in mortal beings. He died first. After this, they reached another world. Yama is the son of the Sun. All beings go to them after death. O Ritvijo! Worship these Yamas who give fruits to everyone according to sin and virtue. (13)