अथर्ववेद (कांड 18)
सोमो॑ मा॒विश्वै॑र्दे॒वैरुदी॑च्या दि॒शः पा॑तु बाहु॒च्युता॑ पृथि॒वी द्यामि॑वो॒परि॑।लो॑क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ ॥ (२८)
सभी देवों के साथ सोम उत्तर दिशा में स्थित राक्षस आदि से मेरी रक्षा करें. पुण्य के फल के रूप में स्वर्ग में मार्ग का प्रवर्तन करने वालों की हम हवि के द्वारा पूजा करते हैं. हे देवगण! इस यज्ञ में तुम भाग प्राप्त करने वाले बनो. (२८)
Soma with all the gods, protect me from the demons etc. located in the north direction. As the fruit of virtue, we worship those who initiate the way in heaven through Havi. O Gods! Become the one who gets a part in this yajna. (28)