अथर्ववेद (कांड 19)
शं नो॑ दे॒वः स॑वि॒ता त्राय॑माणः॒ शं नो॑ भवन्तू॒षसो॑ विभा॒तीः । शं नः॑ प॒र्जन्यो॑ भवतु प्र॒जाभ्यः॒ शं नः॒ क्षेत्र॑स्य॒ पति॑रस्तु श॒म्भुः ॥ (१०)
भयों से रक्षा करते हुए सविता देव हमारे सुख के कारण बनें. सुंदर प्रतीत होती हुई उषाएं हमारा कल्याण करें. वृष्टि करने वाले बादल हमारी प्रजाओं अर्थात् पुत्रों और सेवकों को सुख देने वाले हों. क्षेत्र के स्वामी शंभु हमारा कल्याण करें. (१०)
Protecting from fears, Savita Dev should be the cause of our happiness. May the beautiful ushas benefit us. May the rain clouds give happiness to our subjects i.e. sons and servants. Shambhu, the owner of the area, may we be well-being. (10)