अथर्ववेद (कांड 19)
अ॒ग्निर्मा॑ पातु॒ वसु॑भिः पु॒रस्ता॒त्तस्मि॑न्क्रमे॒ तस्मि॑ञ्छ्रये॒ तां पुरं॒ प्रैमि॑ । स मा॑ रक्षतु॒ स मा॑ गोपायतु॒ तस्मा॑ आ॒त्मानं॒ परि॑ ददे॒ स्वाह॑ ॥ (१)
पृथ्वी स्थानीय देव अग्नि वसु नाम वाले देवों के साथ पूर्व दिशा में मेरी रक्षा करें. वे पैर रखने की क्रिया में और पैर रखने के स्थान में मेरी रक्षा करें. वे उस नगर में मेरी रक्षा करें, जहां मैं जाऊं एवं वे मेरा हित साधन करें. मैं सभी प्रकार से रक्षक अग्नि के प्रति समर्पण करता हूं. यह हवि अग्नि को प्राप्त हो. (१)
Protect me in the east direction with the gods named Agni Vasu, the local god of the earth. They protect me in the act of keeping feet and in the place of placing feet. They should protect me in the city where I go and they serve my interests. I surrender to the protector agni in every way. May this havi be attained by agni. (1)