अथर्ववेद (कांड 19)
वि॒श्वक॑र्मा मा सप्तऋ॒षिभि॒रुदी॑च्या दि॒शः पा॑तु॒ तस्मि॑न्क्रमे॒ तस्मि॑ञ्छ्रये॒ तां पुरं॒ प्रैमि॑ । स मा॑ रक्षतु॒ स मा॑ गोपायतु॒ तस्मा॑ आ॒त्मानं॒ परि॑ ददे॒ स्वाहा॑ ॥ (७)
विश्वकर्मा सप्त ऋषियों के साथ उत्तर दिशा में मेरी रक्षा करें. वे मेरी पैर रखने की क्रिया में एवं स्थान में रक्षा करें. वे उस नगर में मेरी रक्षा और हित साधन करें, जहां मैं जाऊं. मैं विश्वकर्मा के प्रति आत्मसमर्पण करता हूं. यह हवि विश्वकर्मा को प्राप्त हो. (७)
Protect me in the north direction with Vishwakarma Saptrishis. They protect me in the act of keeping my foot and in place. Let them protect and serve me in the city where I go. I surrender to Vishwakarma. May Vishwakarma get this. (7)