हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 19.2.5

कांड 19 → सूक्त 2 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
ता अ॒पः शि॒वा अ॒पोऽय॑क्ष्मं॒कर॑णीर॒पः । यथै॒व तृ॑प्यते॒ मय॒स्तास्त॒ आ द॑त्त भेष॒जीः ॥ (५)
हे ऋत्विजो! प्रसिद्ध, कल्याण करने वाले तथा यक्ष्मा आदि रोगों से छुटकारा दिलाने वाले ओषधि रूप जलों को मेरे सुख की वृद्धि के लिए यहां ले आओ. (५)
O Ritvijo! Bring the famous, welfare and medicinal form waters, which relieve diseases like tuberculosis, here for the increase of my happiness. (5)