हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 19.24.3

कांड 19 → सूक्त 24 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 24
परी॒मं सोम॒मायु॑षे म॒हे श्रोत्रा॑य धत्तन । यथै॑नं ज॒रसे॑ न॒यां ज्योक्श्रोत्रेऽधि॑ जागरत् ॥ (३)
हे सोम! शांतिकर्ता मुझ यजमान को चिरकालीन जीवन के लिए तथा इंद्रियों से साध्य उपदान आदि कार्यो के लिए सभी ओर से धारण करो. चिरकाल तक सभी इंद्रियां सक्रिय रहने पर यह शांतिकर्ता यजमान जागृत रहे. इसे वृद्धावस्था को प्राप्त कराओ. (३)
O Mon! The peacemaker should wear me to the host on all sides for eternal life and for the work of providing gifts etc. from the senses. This peacemaker remained awake when all the senses remained active for a long time. Get it old. (3)