अथर्ववेद (कांड 19)
आयु॑षे त्वा॒ वर्च॑से॒ त्वौज॑से च॒ बला॑य च । यथा॑ हिरण्य॒तेज॑सा वि॒भासा॑सि॒ जनाँ॒ अनु॑ ॥ (३)
हे स्वर्ण को धारण करने वाले पुरुष! चंद्रमा उस स्वर्ण को तुम्हारे बल, लाभ एवं तेज प्राप्त करने के लिए निर्माण करे. जिस प्रकार स्वर्ण तेज से भास्वर होता है, उसी प्रकार तुम भी मनुष्यों को लक्ष्य कर के सुशोभित बनो. (३)
O men who hold gold! May the moon create that gold to gain your strength, benefit and glory. Just as gold shines brightly, so you should also be adorned by targeting human beings. (3)