हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 30
यत्ते॑ दर्भ ज॒रामृ॑त्युः श॒तं वर्म॑सु॒ वर्म॑ ते । तेने॒मं व॒र्मिणं॑ कृ॒त्वा स॒पत्नां॑ ज॒हि वी॒र्यैः ॥ (१)
हे दर्भ! तेरी गांठों में सैकड़ों वृद्धावस्थाएं और मृत्यु व्याप्त हैं. तेरे पास वृद्धावस्था और मृत्यु से बचाने वाला कवच है. उस कवच से रक्षा, जय आदि की कामना करने वाले पुरुष को सुरक्षित कर के अपनी शक्तियों से इस राजा के शत्रुओं को मारो. (१)
O darbh! Hundreds of old age and death pervades your knots. You have a shield to protect you from old age and death. Protect the man who wishes for protection, victory, etc. from that armor and kill the enemies of this king with your powers. (1)

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 30
श॒तं ते॑ दर्भ॒ वर्मा॑णि स॒हस्रं॑ वी॒र्याणि ते । तम॒स्मै विश्वे॒ त्वां दे॑वा ज॒रसे॒ भर्त॒वा अ॑दुः ॥ (२)
हे दर्भमणि! तुम्हारी गांठों में सैकड़ों सुरक्षा कवच और शक्तियां विद्यामान हैं. सभी देवों से रक्षा की कामना करने वाले इस राजा को वृद्धावस्था दूर करने के लिए तुम्हें दिया है. (२)
O darbhamani! There are hundreds of protective shields and powers in your knots. This king, who wishes to protect from all gods, has been given to you to remove old age. (2)

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 30
त्वामा॑हुर्देव॒वर्म॒ त्वां द॑र्भ॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॑म् । त्वामिन्द्र॑स्याहु॒र्वर्म॒ त्वं रा॒ष्ट्राणि॑ रक्षसि ॥ (३)
हे दर्भमणि! तुम्हें देवों का कवच और वेदों का रक्षक कहा गया है. तुम्हें इंद्रक कवच बताया गया है. तुम राष्ट्रों की रक्षा करते हो. (३)
O darbhamani! You have been called the armor of the gods and the protector of the Vedas. You have been described as Indrak Kavach. You protect nations. (3)

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 30
स॑पत्न॒क्षय॑णं दर्भ द्विष॒तस्तप॑नं हृ॒दः । म॒णिं क्ष॒त्रस्य॒ वर्ध॑नं तनू॒पानं॑ कृणोमि ते ॥ (४)
हे दर्भमणि! तुम शत्रुओं का विनाश करने वाले तथा द्वेष करने वालों के हृदय को संतप्त करने वाले हो. हे राजन्‌! मैं दर्भमणि को तुम्हारा रक्षक एवं शक्ति बढ़ाने वाला बनाता हं. (४)
O darbhamani! You are the destroyer of enemies and the one who sings the hearts of those who hate. O king! I make Darbhamani your protector and power enhancer. (4)

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 30
यत्स॑मु॒द्रो अ॒भ्यक्र॑न्दत्प॒र्जन्यो॑ वि॒द्युता॑ स॒ह । ततो॑ हिर॒ण्ययो॑ बि॒न्दुस्ततो॑ द॒र्भो अ॑जायत ॥ (५)
जिस मेघ से जल बरसता है, उस से बिजली की गड़गड़ाहट के साथ हिरण्यमय बूंद प्रकट हुई, उन्हीं से दर्भ उत्पन्न हुआ है. (५)
From the cloud from which water rains, the deery drop appeared with the thunder of electricity, from them the darbha has been born. (5)