अथर्ववेद (कांड 19)
न त्वा॒ पूर्वा॒ ओष॑धयो॒ न त्वा॑ तरन्ति॒ या नवाः॑ । विबा॑ध उ॒ग्रो ज॑ङ्गि॒डः प॑रि॒पाणः॑ सुम॒ङ्गलः॑ ॥ (७)
हे जंगिड़ मणि! सृष्टि के आदि में उत्पन्न ओषधियां अर्थात् जड़ीबूटियां तुम से श्रेष्ठ नहीं हैं. नई ओषधियां भी तुम से श्रेष्ठ नहीं हैं. हे शत्रुसेना आदि को बाधा उत्पन्न करने वाली जंगिड मणि! तुम उग्र, चारों ओर से रक्षा करने वाली तथा भलीभांति मंगलकारी हो. (७)
O jewel! The herbs produced in the beginning of creation are not superior to you. Even new medicines are not superior to you. O jangid mani that obstructs the enemy army etc. You are fierce, protective and well-mannered. (7)