अथर्ववेद (कांड 19)
शी॑र्षलो॒कं तृती॑यकं सद॒न्दिर्यश्च॑ हाय॒नः । त॒क्मानं॑ विश्वधावीर्याध॒राञ्चं॒ परा॑ सुव ॥ (१०)
तृतीय लोक अर्थात् स्वर्ग को तुम्हारा शीश कहा जाता है. वह सभी रोगों का खंडन करने वाला हो. हे सभी प्रकार की शक्तियों से युक्त कुष्ठ! तुम सभी रोगों को तथा नीचे होने वाले पतन को हम से दूर करो. (१०)
The third world i.e. heaven is called your head. He is going to refute all diseases. O leprosy with all kinds of powers! Remove all the diseases and the fall down from us. (10)