हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
यामाहु॑तिं प्रथ॒मामथ॑र्वा॒ या जा॒ता या ह॒व्यमकृ॑णोज्जा॒तवे॑दाः । तां त॑ ए॒तां प्र॑थ॒मो जो॑हवीमि॒ ताभि॑ष्टु॒प्तो व॑हतु ह॒व्यम॒ग्निर॒ग्नये॒ स्वाहा॑ ॥ (१)
हे अग्नि! अथर्वा रूप परमात्मा ने सृष्टि से पूर्व अपने द्वारा रचे हुए देवताओं को प्रसन्न करने के लिए तुम में जो आहुति दी थी और तुम ने उस आहुति को देवगण तक पहुंचने योग्य बनाया, हे अग्नि! मैं सब यजमानों से पहले उस आहुति को तुम्हारे मुख में डालता हूं. हवि प्राप्त कराने वाले दूत रूप, देवता रूप एवं हवि प्रक्षेप के आधार रूप तीन रूपों से स्तुति किए गए अग्नि मेरा यह हवि देवों को प्राप्त कराएं. (१)
O agni! The sacrifice made by the Atharva form God in you to please the gods created by Him before creation and you made that sacrifice worthy of reaching the gods, O Agni! I put that sacrifice in your mouth before all the hosts. Get this Havi Devas of Agni, who are praised in three forms as the messenger form, the deity form and the basis of the Havi projection. (1)

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
आकू॑तिं दे॒वीं सु॒भगां॑ पु॒रो द॑धे चि॒त्तस्य॑ मा॒ता सु॒हवा॑ नो अस्तु । यामा॒शामेमि॒ केव॑ली॒ सा मे॑ अस्तु वि॒देय॑मेनां॒ मन॑सि॒ प्रवि॑ष्टाम् ॥ (२)
मैं तात्पर्य रूप, प्रकाशित होने वाली एवं शोभन भाग्य से युक्त वाणी अर्थात्‌ सरस्वती की सेवा करता हूं. पुत्र जिस प्रकार माता के वश में होता है, उसी प्रकार मेरे मन को वश में रखती हुई हमारे आह्वान से हमारे अनुकूल हो. मैं जो कामना करता हूं, वह केवल मेरी हो, किसी अन्य को प्राप्त न हो. मैं अपनी कामना को सदा प्राप्त करूं. (२)
I serve the name of Saraswati, a voice that is manifested and blessed with good fortune. Just as the son is under the control of the mother, so keep my mind in control and be compatible with our call. What I wish for is mine only, no one else should get it. May I always receive my wish. (2)

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
आकू॑त्या नो बृहस्पत॒ आकू॑त्या न॒ उपा ग॑हि । अथो॒ भग॑स्य नो धे॒ह्यथो॑ नः सु॒हवो॑ भव ॥ (३)
हे बृहस्पति! तुम सब देवों के पालनकर्ता हो. तुम सभी को देने के लिए आओ. तुम सरस्वती को हमारे अनुकूल करने के लिए आओ. तुम हमें सौभाग्य प्रदान करो. तुम हमारे आह्वान मात्र से हमारे अनुकूल बनो. (३)
O Jupiter! You are the sustainers of all gods. Come to give you all. You come to Saraswati to suit us. You give us good luck. You adapt to us by merely invoking us. (3)

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
बृह॒स्पति॑र्म॒ आकू॑तिमाङ्गिर॒सः प्रति॑ जानातु॒ वाच॑मे॒ताम् । यस्य॑ दे॒वा दे॒वताः॑ संबभू॒वुः स सु॒प्रणी॑ताः॒ कामो॒ अन्वे॑त्व॒स्मान् ॥ (४)
अंगिराओं के पुत्र बृहस्पति देव सब वावयों की रूपा सरस्वती को मुझे देने के लिए स्मरण करें. स्त्री-पुरुष रूप सभी देवता जिस बृहस्पति के वश में है और सभी देवता जिस बृहस्पति के द्वारा कार्यों में लगाए गए हैं, वे बृहस्पति देव हम कामना करने वालों को फल देने के लिए आएं. (४)
Remember Brihaspati Dev, the son of the Angiras, for giving Saraswati, the form of all the vaavas, to me. The male and female form, all the gods are under the control of Jupiter and the Jupiter by which all the gods are engaged in the works, that Jupiter Dev should come to give fruits to those who wish us. (4)