अथर्ववेद (कांड 19)
ब्रह्म॒ स्रुचो॑ घृ॒तव॑ती॒र्ब्रह्म॑णा॒ वेदि॒रुद्धि॑ता । ब्रह्म॑ य॒ज्ञस्य॒ तत्त्वं॑ च ऋ॒त्विजो॒ ये ह॑वि॒ष्कृतः॑ । श॑मि॒ताय॒ स्वाहा॑ ॥ (२)
घृत से पूर्ण तथा होम का साधन सुवा भी ब्रह्म है. ब्रह्म ने ही यज्ञवेदी को खोदा है. ब्रह्म यज्ञ का तत्त्व है. हवि तैयार करने वाले ऋत्विज् भी ब्रह्म ही हैं. अभेद को प्राप्त ब्रह्म के लिए आहुति उत्तम हो. (२)
Suva, the source of the whole and home from ghrit, is also Brahman. Brahma has dug the yagyavedi. Brahma is the principle of yajna. The Ritvij who prepares the Havi is also Brahman. Sacrifice should be best for Brahman, who attains impregnation. (2)