अथर्ववेद (कांड 19)
अ॒स्मिन्म॒णावेक॑शतं वी॒र्या᳡णि स॒हस्रं॑ प्रा॒णा अ॑स्मि॒न्नस्तृ॑ते । व्या॒घ्रः शत्रू॑न॒भि ति॑ष्ठ॒ सर्वा॒न्यस्त्वा॑ पृतन्या॒दध॑रः॒ सो अ॒स्त्वस्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु ॥ (५)
इंद्र के कवच से सुरक्षित होने के कारण इस आस्तृत मणि के एक सौ एक सामर्थ्य हैं तथा हजारों प्राण अर्थात् बल हैं. तुम बाघ के समान सभी शत्रुओं पर आक्रमण कर के उन्हें पराजित करने में समर्थ बनो. मेरा जो शत्रु तुझ मणि से युद्ध करने की इच्छा करे, वह पराजित हो. हे आस्तृत मणि! सब देव तुम्हारी रक्षा करें. (५)
Being protected from Indra's armor, this insulated gem has one hundred and one powers and thousands of pranas i.e. force. Be able to attack all enemies like a tiger and defeat them. May my enemy, whoever wishes to fight you with mani, be defeated. O swami! May all gods protect you. (5)