अथर्ववेद (कांड 19)
का॒लो अश्वो॑ वहति स॒प्तर॑श्मिः सहस्रा॒क्षो अ॒जरो॒ भूरि॑रेताः । तमा रो॑हन्ति क॒वयो॑ विप॒श्चित॒स्तस्य॑ च॒क्रा भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ॥ (१)
सात किरणों अथवा रस्सियों वाला, हजार नेत्रों वाला, वृद्धावस्था रहित तथा अत्यधिक वीर्य से युक्त कालरूपी घोड़ा रथ को खींचता है. सभी लोक उस के चक्र अर्थात् पहिए हैं. विद्वान् पुरुष उस रथ पर सवार होते हैं. (१)
A kal-like horse with seven rays or ropes, with a thousand eyes, without old age and with excessive semen, pulls the chariot. All the worlds are its chakras i.e. wheels. Learned men ride on that chariot. (1)