अथर्ववेद (कांड 19)
प्रि॒यं मा॑ कृणु दे॒वेषु॑ प्रि॒यं राज॑सु मा कृणु । प्रि॒यं सर्व॑स्य॒ पश्य॑त उ॒त शू॒द्र उ॒तार्ये॑ ॥ (१)
हे अग्नि! तुम मुझे देवों का प्रिय बनाओ. मुझे राजाओं का भी प्रिय करो. मैं सभी देखने वालों का, शूट्रों का और आर्यो का प्रिय बनूं. अर्थात् सब का प्रिय बनूं. (१)
O agni! You make me dear to the gods. Make me dear to kings too. May I be dear to all the onlookers, shoots and Aryans. That is, be the beloved of everyone. (1)