अथर्ववेद (कांड 19)
शा॒न्ता द्यौः शा॒न्ता पृ॑थि॒वी शा॒न्तमि॒दमु॒र्वन्तरि॑क्षम् । शा॒न्ता उ॑द॒न्वती॒रापः॑ शा॒न्ता नः॑ स॒न्त्वोष॑धीः ॥ (१)
अपने कारण से उत्पन्न दोषों को शांत करता हुआ द्युलोक हमें सुख प्रदान करे. विशाल अंतरिक्ष और पृथ्वी हमें सुख प्रदान करें. सागरों के जल तथा ओषधियां हमें सुख देने वाले हों. (१)
May Dulok give us happiness by calming the defects caused by our cause. May the vast space and earth give us happiness. May the waters and medicines of the oceans give us happiness. (1)