अथर्ववेद (कांड 19)
ब्रह्म॑ प्र॒जाप॑तिर्धा॒ता लो॒का वेदाः॑ सप्तऋ॒षयो॒ऽग्नयः॑ । तैर्मे॑ कृ॒तं स्व॒स्त्यय॑न॒मिन्द्रो॑ मे॒ शर्म॑ यच्छतु ब्र॒ह्मा मे॒ शर्म॑ यच्छतु । विश्वे॑ मे दे॒वाः शर्म॑ यच्छन्तु॒ सर्वे॑ मे दे॒वाः शर्म॑ यच्छन्तु ॥ (१२)
सच्चिदानंद लक्षण वाला ब्रह्म, प्रजापति, चार मुखों वाले ब्रह्मा, सात लोक, अंगों सहित चार वेद, सात ऋषि तथा तीन अग्नियां मुझे शांति देने वाली हों. इन सब ने मुझे स्वस्त्य यमन अर्थात् शांति प्रदान की है. इंद्र और ब्रह्मा मुझे सुख प्रदान करें. विश्वे देव मुझे सुख प्रदान करें तथा विश्वे देव मुझे सुख प्रदान करें. (१२)
Brahm, Prajapati with sachchidananda symptoms, Brahma with four faces, seven worlds, four Vedas with organs, seven sages and three agnis should give me peace. All this has given me swastya Yemen i.e. peace. May Indra and Brahma give me happiness. May Vishwe Dev give me happiness and May Vishwe Dev give me happiness. (12)