हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.20.3

कांड 2 → सूक्त 20 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 20
वायो॒ यत्ते॒ ऽर्चिस्तेन॒ तं प्रत्य॑र्च॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (३)
हे वायु देव! तुम्हारा जो वेग है, उस का प्रयोग उन के प्रति करो जो हम से द्वेष रखते हैं अथवा हम जिन से द्वेष रखते हैं. (३)
O God of air! Use your speed towards those who hate us or those we hate. (3)