अथर्ववेद (कांड 2)
वायो॒ यत्ते॒ ऽर्चिस्तेन॒ तं प्रत्य॑र्च॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (३)
हे वायु देव! तुम्हारा जो वेग है, उस का प्रयोग उन के प्रति करो जो हम से द्वेष रखते हैं अथवा हम जिन से द्वेष रखते हैं. (३)
O God of air! Use your speed towards those who hate us or those we hate. (3)