हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.20.4

कांड 2 → सूक्त 20 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 20
वायो॒ यत्ते॑ शो॒चिस्तेन॒ तं प्रति॑ शोच॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (४)
हे वायु देव! तुम्हारी जो दूसरों को शोक मग्न करने की शक्ति है, उस का प्रयोग उन लोगों के प्रति करो जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (४)
O Vayu Dev! Use your power to grieve others against those who hate us or those we hate. (4)