अथर्ववेद (कांड 2)
आपो॒ यद्वः॑ शो॒चिस्तेन॒ तं प्र॑ति शोचत॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (४)
हे जल देव! तुम्हारी जो दूसरों को शोकमग्न करने की शक्ति है, उस से उन्हें शोकमग्न करो जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (४)
O God of Water! Grieve those who hate us or those we hate with the power you have to grieve others. (4)