अथर्ववेद (कांड 2)
आपो॒ यद्व॒स्तेज॒स्तेन॒ तम॑ते॒जसं॑ कृणुत॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (५)
हे जल देव! तुम्हारा जो तेज है, उस के द्वारा उन लोगों को तेजहीन बनाओ जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (५)
O God of Water! Through the glory of yours, make those who hate us or those whom we hate. (5)