अथर्ववेद (कांड 2)
तया॒हं शत्रू॑न्त्साक्ष॒ इन्द्रः॑ सालावृ॒काँ इ॑व । प्राशं॒ प्रति॑प्राशो जह्यर॒सान्कृ॑ण्वोषधे ॥ (५)
ग्वारपाठे को धारण कर के अथवा खा कर मैं अपने विरोधी वक्ताओं को उसी प्रकार निरुत्तर कर दूंगा, जिस प्रकार इंद्र ने जंगली कुत्तों का रूप धारण करने वाले असुरों को हराया था. हे ग्वारापाठा! मुझ प्रश्न करने वाले से जो विरोधी प्रतिप्रश्न करते हैं, उन्हें तुम पराजित करो तथा मेरे विरोधी वक्ताओं का गला सुखा दो, जिस से वे बोल न सकें. (५)
By wearing or eating a guarpatha, I will neutralize my opposing speakers in the same way that Indra defeated the asuras who took the form of wild dogs. O God! Defeat the opponents who question me and dry the throats of my opposing speakers so that they cannot speak. (5)