हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 29
पार्थि॑वस्य॒ रसे॑ देवा॒ भग॑स्य त॒न्वो॑३ बले॑ । आ॑यु॒ष्य॑म॒स्मा अ॒ग्निः सूर्यो॒ वर्च॒ आ धा॒द्बृह॒स्पतिः॑ ॥ (१)
पृथ्वी संबंधी पदार्थों के रस को पीने वाले पुरुष को इंद्र आदि देव भग देवता के समान बली बनाएं. सूर्य इस पुरुष को दीर्घ आयु प्रदान करें. सब के प्रेरक आदित्य एवं बृहस्पति इसे तेज प्रदान करें. (१)
Make a man who drinks the juice of earth-related substances as strong as Indra Adi Dev Dev Bhag Devta. May the Sun give this man a long life. May Aditya and Jupiter, the motivators of all, give it a sharp. (1)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 29
आयु॑र॒स्मै धे॑हि जातवेदः प्र॒जां त्व॑ष्टरधि॒निधे॑ह्य॒स्मै । रा॒यस्पोषं॑ सवित॒रा सु॑वा॒स्मै श॒तं जी॒वाति॑ श॒रद॒स्तवा॒यम् ॥ (२)
हे जातवेद अग्नि! इसे सौ वर्ष की दीर्घ आयु प्रदान करो. हे त्वष्टा देव! इस के लिए अधिक संतान स्थापित करो. हे सब के प्रेरक सविता देव! इस के लिए धन की अधिकता को प्रेरित करो. आप सब का यह पुत्र सौ वर्ष तक जीवित रहे. (२)
O jataved agni! Give it a long life of a hundred years. O God of Tvashta! Set up more offspring for this. O inspiration of all Savita Dev! This motivates an excess of wealth. This son of all of you lived for a hundred years. (2)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 29
आ॒शीर्ण॒ ऊर्ज॑मु॒त सौ॑प्रजा॒स्त्वं दक्षं॑ धत्तं॒ द्रवि॑णं॒ सचे॑तसौ । जयं॒ क्षेत्रा॑णि॒ सह॑सा॒यमि॑न्द्र कृण्वा॒नो अ॒न्यानध॑रान्त्स॒पत्ना॑न् ॥ (३)
हमारे आशीर्वाद सत्य हों. हे द्यावा पृथ्वी! इसे अन्न दो तथा उत्तम संतान वाला बनाओ. तुम दोनों एकमत हो कर इसे बल एवं धन प्रदान करो. हे इंद्र देव! यह पुरुष अपने बल से शत्रुओं को विजय और खेतों को अपने अधिकार में करता हुआ अपने शत्रुओं को पराजित करे. (३)
May our blessings be true. O earth! Give it food and make it good children. Both of you agree and give it strength and money. O Indra Dev! This man should defeat his enemies by conquering the enemies and taking possession of the fields with his own strength. (3)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 29
इन्द्रे॑ण द॒त्तो वरु॑णेन शि॒ष्टो म॒रुद्भि॑रु॒ग्रः प्रहि॑तो नो॒ आग॑न् । ए॒ष वां॑ द्यावापृथिवी उ॒पस्थे॒ मा क्षु॑ध॒न्मा तृ॑षत् ॥ (४)
इंद्र से जीवन प्राप्त कर के, वरुण की अनुमति ले कर तथा मरुतों से बल प्राप्त कर के भेजा हुआ यह हमारे समीप आया है. हे द्यावा पृथ्वी! तुम्हारी गोद में वर्तमान यह पुरुष न कभी भूखा रहे और न कभी प्यास से व्याकुल हो. (४)
It has come to us after getting life from Indra, taking the permission of Varuna and getting strength from the Maruts. O earth! This present man in your lap should never be hungry or disturbed by thirst. (4)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 29
ऊर्ज॑मस्मा ऊर्जस्वती धत्तं॒ पयो॑ अस्मै पयस्वती धत्तम् । ऊर्ज॑म॒स्मै द्याव॑पृथि॒वी अ॑धातां॒ विश्वे॑ दे॒वा म॒रुत॒ ऊर्ज॒मापः॑ ॥ (५)
हे शक्तिशालिनी द्यावा पृथ्वी! इस भूखे को बलकारक अन्न दो. हे जलपूर्ण द्यावा पृथ्वी! इस प्यासे की रोग निवृत्ति के लिए जल प्रदान करो. प्रार्थना करने पर द्यावा पृथ्वी इसे अन्न दें. विश्वे देव, मरुदगण एवं जल देवता इसे बल प्रदान करें. (५)
O powerful earth! Give this hungry food. O water-rich earth! Provide water for the retirement of this thirsty person. On praying, give it food. May Vishwa Dev, Marudagan and Water God give strength to it. (5)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 29
शि॒वाभि॑ष्टे॒ हृद॑यं तर्पयाम्यनमी॒वो मो॑दिषीष्ठाः सु॒वर्चाः॑ । स॑वा॒सिनौ॑ पिबतां म॒न्थमे॒तम॒श्विनो॑ रू॒पं प॑रि॒धाय॑ मा॒याम् ॥ (६)
हे प्यासे पुरुष! मैं तेरे नीरस हृदय को सुखकारी जलों से तृप्त करता हूं. इस के पश्चात तू रोग रहित, उत्तम तेज युक्त एवं प्रसन्न हो जाएगा. एक मत धारण करने वाले अश्विनीकुमार मायारूप बना कर इस सत्तू को पीने के लिए शक्ति तैयार करें. (६)
O thirsty man! I satisfy your dull heart with pleasant waters. After this, you will be disease-free, well-radiant and happy. Ashwinikumar, who holds one opinion, should make mayarup and prepare power to drink this sattu. (6)

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 29
इन्द्र॑ ए॒तां स॑सृजे वि॒द्धो अग्र॑ ऊ॒र्जां स्व॒धाम॒जरां॒ सा त॑ ए॒षा । तया॒ त्वं जी॑व श॒रदः॑ सु॒वर्चा॒ मा त॒ आ सु॒स्रोद्भि॒षज॑स्ते अक्रन् ॥ (७)
प्राचीन काल में वृत्रासुर के द्वारा घायल इंद्र ने प्यास से व्याकुल हो कर बलकारक अन्न एवं वृद्धावस्था का विनाश करने वाला यह सत्तू बनाया था. वही अन्न और सत्तू तुझे दिया जा रहा है. इस के द्वारा तू उत्तम तेज वाला बन कर सौ वर्ष तक जीवित रह. पिया हुआ सत्तू तेरे ह में रह कर बल प्रदान करे. देवों के वैद्य अश्चिनीकुमारों ने तेरे लिए यह ओषधि तैयार की . (७)
In ancient times, Indra, who was injured by Vritrasura, was disturbed by thirst and made this sattu that destroys strong food and old age. The same food and sattu are being given to you. Through this, you should live for a hundred years by becoming the best bright. May the drunk sattu stay in your house and give strength. The Aschinikumaras , the physicians of the gods , prepared this medicine for you . (7)