हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.29.1

कांड 2 → सूक्त 29 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 29
पार्थि॑वस्य॒ रसे॑ देवा॒ भग॑स्य त॒न्वो॑३ बले॑ । आ॑यु॒ष्य॑म॒स्मा अ॒ग्निः सूर्यो॒ वर्च॒ आ धा॒द्बृह॒स्पतिः॑ ॥ (१)
पृथ्वी संबंधी पदार्थों के रस को पीने वाले पुरुष को इंद्र आदि देव भग देवता के समान बली बनाएं. सूर्य इस पुरुष को दीर्घ आयु प्रदान करें. सब के प्रेरक आदित्य एवं बृहस्पति इसे तेज प्रदान करें. (१)
Make a man who drinks the juice of earth-related substances as strong as Indra Adi Dev Dev Bhag Devta. May the Sun give this man a long life. May Aditya and Jupiter, the motivators of all, give it a sharp. (1)