अथर्ववेद (कांड 2)
एयम॑ग॒न्पति॑कामा॒ जनि॑कामो॒ऽहमाग॑मम् । अश्वः॒ कनि॑क्रद॒द्यथा॒ भगे॑ना॒हं स॒हाग॑मम् ॥ (५)
पति की अभिलाषा करती हुई यह स्त्री मेरे समीप आई थी. मैं ने भी पत्नी की कामना से इसे प्राप्त किया था. घोड़ा जिस प्रकार हिनहिनाता हुआ घोड़ी के पास जाता है, उसी प्रकार मैं इस नारी से मिला हूं. (५)
This woman came close to me, wishing for her husband. I also received it from my wife's wish. Just as a horse goes to the mare, I have met this woman. (5)