अथर्ववेद (कांड 2)
उ॒द्यन्ना॑दि॒त्यः क्रिमी॑न्हन्तु नि॒म्रोच॑न्हन्तु र॒श्मिभिः॑ । ये अ॒न्तः क्रिम॑यो॒ गवि॑ ॥ (१)
उदय होते हुए तथा अस्त होते हुए सूर्य अपनी फैलने वाली किरणों के द्वारा उन कीटाणुओं का विनाश करे जो गाय के शरीर के भीतर स्थित हैं. (१)
While rising and setting, the sun, through its spreading rays, destroys the germs that are located within the cow's body. (1)