हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.33.1

कांड 2 → सूक्त 33 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 33
अ॒क्षीभ्यां॑ ते॒ नासि॑काभ्यां॒ कर्णा॑भ्यां॒ छुबु॑का॒दधि॑ । यक्ष्मं॑ शीर्ष॒ण्यं॑ म॒स्तिष्का॑ज्जि॒ह्वाया॒ वि वृ॑हामि ते ॥ (१)
हे यक्ष्मा रोग से पीड़ित पुरुष! मैं तेरी आंखों से, नाक से, कानों से तथा ठोड़ी से यक्ष्मा रोग को बाहर निकालता हूं. मैं तेरे सिर में से, मस्तिष्क से तथा जीभ से यक्ष्मा रोग को बाहर निकालता हूं. (१)
O man suffering from tuberculosis! I take tuberculosis out of your eyes, nose, ears and chin. I take tuberculosis out of your head, from the brain and from the tongue. (1)