हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 2.9.1

कांड 2 → सूक्त 9 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 2)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
दश॑वृक्ष मु॒ञ्चेमं रक्ष॑सो॒ ग्राह्या॒ अधि॒ यैनं॑ ज॒ग्राह॒ पर्व॑सु । अथो॑ एनं वनस्पते जी॒वानां॑ लो॒कमुन्न॑य ॥ (१)
हे ढाक, गूलर आदि दस वृक्षों से बनी हुई मणि! ब्रह्म राक्षस और राक्षसी से पकड़े हुए इस पुरुष को छुड़ाओ. उस ब्रह्म राक्षसी ने इसे शरीर के जोड़ों में पकड़ा हुआ है. हे वनस्पति से निर्मित मणि! तू इसे जीवित प्राणियों के लोक में पहुंचा अर्थात्‌ इसे पुनः जीवित कर. (१)
O gem made of ten trees like dhak, sycamore etc! Rescue this man holding brahma from the demon and demon. That Brahma rakshasi is holding it in the joints of the body. O gem made of vegetation! You brought it to the realm of living beings, that is, revive it. (1)