हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.104.4

कांड 20 → सूक्त 104 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 104
त्वं दा॒ता प्र॑थ॒मो राध॑साम॒स्यसि॑ स॒त्य ई॑शान॒कृत् । तु॑विद्यु॒म्नस्य॒ युज्या॑ वृणीमहे पु॒त्रस्य॒ शव॑सो म॒हः ॥ (४)
हे धनों को देने वाले अग्नि! तुम सब को प्रभुता प्रदान करते हो. तुम जलों के पुत्र हो. हम प्रदीप्त अग्नि का वरण करते हैं. (४)
O agni that gives riches! You give sovereignty to everyone. You are the son of waters. We choose the illuminated agni. (4)