हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.106.1

कांड 20 → सूक्त 106 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 106
तव॒ त्यदि॑न्द्रि॒यं बृ॒हत्तव॒ शुष्म॑मु॒त क्रतु॑म् । वज्रं॑ शिशाति धि॒षणा॒ वरे॑ण्यम् ॥ (१)
हे इंद्र! तुम्हारा बल बुद्धि से वरण करने योग्य है. तुम्हारा बल कर्मरूपी वज्र को तीव्र करता है. (१)
O Indra! Your strength is worthy of selection with intelligence. Your force intensifies the karma-like thunderbolt. (1)